
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का यूनियन बजट पेश किया। यह उनका लगातार 9वां बजट और मोदी सरकार का 15वां आम बजट रहा। बजट को लेकर छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के आम लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी रहीं कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में क्या सस्ता होगा और किन चीज़ों पर खर्च बढ़ेगा।
हेल्थ सेक्टर: मरीजों को सीधी राहत
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि कैंसर की 17 दवाएं और 7 गंभीर बीमारियों की दवाएं अब सस्ती होंगी। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी सरकारी अस्पतालों और सीमित आय पर निर्भर है, यह फैसला गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
बीड़ी सस्ती, सिगरेट नहीं
बजट के बाद बीड़ी सस्ती हुई है, जबकि सिगरेट की कीमतों में कोई राहत नहीं दी गई। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और श्रमिक वर्ग में बीड़ी का अधिक चलन है, ऐसे में इसका असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
चमड़ा उद्योग को फायदा
लेदर के जूते और अन्य चमड़े से बने प्रोडक्ट सस्ते होंगे। इससे छत्तीसगढ़ के छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
टेक्नोलॉजी और ईवी सेक्टर को बढ़ावा
मोबाइल फोन
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की बैटरियां: बजट के बाद सस्ती होंगी। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहे इलेक्ट्रिक वाहन और मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है।
ऊर्जा और घरेलू जरूरतें
बायोगैस मिक्स्ड CNG सस्ती होगी
माइक्रोवेव ओवन जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे
सोलर से जुड़े उपकरण और कपड़े भी सस्ते होने की उम्मीद है
इसका असर शहरी और ग्रामीण—दोनों क्षेत्रों के घरेलू बजट पर पड़ेगा।
बजट के बाद क्या हुआ महंगा?
छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं को कुछ चीज़ों में बढ़ी कीमतों के लिए भी तैयार रहना होगा—शराब महंगी होगी
स्क्रैप और खनिज महंगे होंगे (जिसका असर उद्योगों पर पड़ सकता है)
छत्तीसगढ़ के लिहाज़ से कुल मिलाकर क्या संकेत?
यह बजट आम आदमी, मरीजों, युवाओं और उपभोक्ताओं को राहत देने वाला नजर आता है, जबकि नशा, सट्टा और खनन जैसे क्षेत्रों में सख्ती के संकेत भी देता है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लिए, जहां स्वास्थ्य, खेल, ऊर्जा और रोजगार अहम मुद्दे हैं, यह बजट मिश्रित लेकिन राहत-केंद्रित माना जा सकता है।



