कवर्धापंडरिया

पंडरिया शक्कर कारखाना में श्रमिकों को 6 महीने से नहीं मिली मजदूरी। परिवार के भरण पोषण में भारी दिक्कतों का करना पड़ रहा सामना …

पंडरिया, 1 जून 2026।
पंडरिया शक्कर कारखाना श्रमिक कल्याण संघ द्वारा श्रमिकों के लंबे समय से लंबित भुगतान की समस्या को लेकर प्रबंध संचालक लो. पू. स. व. मा. प. स. शक्कर कारखाना मर्या. पंडरिया, जिला कबीरधाम को ज्ञापन सौंपा गया।


संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों का जनवरी एवं फरवरी माह का भुगतान पिछले लगभग 6 माह से लंबित है, जिसके कारण श्रमिक एवं उनके परिवार गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। वर्तमान महंगाई के दौर में खेती-किसानी, बच्चों की स्कूल एवं कॉलेज फीस, कॉपी-पुस्तक खरीदने तथा दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में भारी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं।
श्रमिक कल्याण संघ ने ज्ञापन के माध्यम से प्रबंधन का ध्यान श्रमिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए मांग की है कि लंबित भुगतान का अति शीघ्र भुगतान किया जाए, ताकि श्रमिकों को राहत मिल सके और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
संघ ने कहा कि श्रमिक कारखाने की रीढ़ हैं और उनके परिश्रम का समय पर उचित भुगतान होना आवश्यक है। यदि जल्द भुगतान नहीं किया जाता है, तो श्रमिकों में असंतोष बढ़ सकता है।

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अंत में श्रमिक कल्याण संघ ने प्रबंध संचालक से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जनवरी एवं फरवरी माह के लंबित भुगतान को तत्काल जारी करने की मांग की है।

असफल रहे – प्रबंध संचालक

जब प्रबंध संचालक कौशिक जब प्रभार लिए तब इनके द्वारा अपने उच्च अधिकारी,क्षेत्रिय जनप्रतिनिधि,किसान, श्रमिक भाइयों को बोला जाता था कि हम कारखाना को सुधारेंगे, आउटशोर्शिंग,घर बैठे फर्जी पेमेंट बंद ,ओम इंटर प्राइजेस, केस्टैक,ग्लोबल जैसे बाहरी ठेका कंपनी बंद और समय पर किसान,मजदूरों का भुगतान करने की बात कही जाती थी जिसके चलते कारखाना के सैकड़ों मजदूरों को कारखाना से निकाला गया सैकड़ों मजदूर का रोजगार छीन कर बेरोजगार किया गया !

लेकिन प्रबंधन साहब अपनी कथनी से असफल रहे कारखाना सुधारने की तो दूर गर्त में डाल रहे हैं न आउट सोर्सिंग,न बाहरी ठेका,न घर बैठे फर्जी पेमेंट बंद कर पाए बल्कि और बढ़ावा दिया जा रहा है
रही बात किसान की गन्ना के मूल भुगतान तो लगभग पूरी भुगतान ही बाकी साथ ही काम करने वाले मजदूर ,श्रमिक का 6 महीना से भुगतान बाकी है इसको बहुत निंदनीय और असफल संचालन कहा जा सकता है
क्या ऐसे ही कारखाना को सरदार बनाया या सुधारा जाता है?

दुर्भाग्य की बात है–किसान भुगतान

पंडरिया क्षेत्र के किसानों का भुगतान पेराई सीजन सत्र 2025–26 से आज तक गन्ना का मूल भुगतान लंबित होने के कारण किसानों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान समय में कृषि कार्यों, बीज एवं खाद की व्यवस्था, बैंक ऋण की किस्त, बच्चों की शिक्षा तथा घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समय पर भुगतान नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए धनराशि की आवश्यकता है, लेकिन भुगतान लंबित होने के कारण किसानों में चिंता और नाराजगी बढ़ी हुई हैं।

किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए विगत लंबित भुगतान को तत्काल जारी किया जाए, ताकि वे अपने कृषि एवं पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें।

इस स्थिति में भुगतान देरी में करेगा तो आगामी पेराई सीजन में किसान कारखाना में गन्ना देने मे पीछे हटेंगे जिससे
कारखाना को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा

कारखाना का सुरक्षा करने वाले – स्वयं असुरक्षित

पंडरिया शक्कर कारखाना में दिन-रात कारखाने की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा गार्ड आज स्वयं असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में कार्य करने को मजबूर हैं। कारखाने की संपत्ति, मशीनरी एवं व्यवस्था की सुरक्षा का दायित्व निभाने वाले सुरक्षा कर्मियों को लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
संघ का कहना है उन्हें समय पर वेतन भुगतान नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। लगातार आर्थिक संकट के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। इसके अलावा कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं एवं सुरक्षा संसाधनों की भी कमी है।
श्रमिक कल्याण संघ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि जो गार्ड कर्मचारी कारखाने की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनकी समस्याओं का समाधान करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। संघ ने मांग की है कि सुरक्षा गार्डों का लंबित वेतन शीघ्र भुगतान किया जाए ।
“जो कारखाने की सुरक्षा करते हैं, उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।”

संघ ने कहना है कि यदि कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो सुरक्षा गार्डों एवं श्रमिकों के हित में आगे की रणनीति तय कर आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

Tilesh Kumar Sen

संपादक, छत्तीसगढ़ लाइव 24

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